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RADHA RANI GAU SEVA TRUST

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राधा रानी गौ सेवा ट्रस्ट एक पवित्र और सेवाभावी संस्था है, जिसका मुख्य उद्देश्य बीमार, घायल और बेसहारा गौ वंश सहित अन्य निराश्रित जीव-जंतुओं की देखभाल, पालन-पोषण और चिकित्सा सेवा प्रदान करना है। यह ट्रस्ट मानवीय संवेदनाओं, धार्मिक मूल्यों और भारतीय संस्कृति में गौ माता के महत्व को समझते हुए समर्पण भाव से कार्य कर रहा है।

आज के युग में जब गायों को सड़कों पर बेसहारा छोड़ दिया जाता है या दुर्घटनाओं का शिकार बनती हैं, तब राधा रानी गौ सेवा ट्रस्ट उन्हें संरक्षण प्रदान करता है। यह संस्था घायल और बीमार गायों को उठाकर अपने आश्रय स्थल तक पहुंचाती है, जहाँ उन्हें उचित चिकित्सा, पोषण और सुरक्षा प्रदान की जाती है। ट्रस्ट द्वारा अनुभवी पशु चिकित्सकों की देखरेख में इलाज कराया जाता है, ताकि उन्हें शीघ्र स्वस्थ किया जा सके।

ट्रस्ट का उद्देश्य केवल गौ सेवा तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य निराश्रित पशु-पक्षियों की भी सहायता करना इसका प्रमुख कार्य है। संस्थान नियमित रूप से खाद्य वितरण, टीकाकरण शिविर और जन जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन करता है, जिससे समाज में पशुओं के प्रति दया और करुणा का भाव जागृत हो सके।

राधा रानी गौ सेवा ट्रस्ट निःस्वार्थ भाव से संचालित होता है और इसकी गतिविधियाँ जनसहयोग व् दान पर आधारित हैं। यह ट्रस्ट भारतीय संस्कृति में ‘गौ सेवा ही सर्वोत्तम सेवा’ की भावना को जीवंत करता है और पशु कल्याण के क्षेत्र में एक प्रेरणास्रोत बन चुका है। इसके द्वारा किया जा रहा कार्य वास्तव में मानवता की सच्ची सेवा का उदाहरण है।

गाय से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारी ।

गौ माता जिस जगह खड़ी रहकर आनंदपूर्वक चैन की सांस लेती है । वहां वास्तु दोष समाप्त हो जाते हैं ।

जिस जगह गौ माता खुशी से रभांने लगे उस जगह देवी देवता पुष्प वर्षा करते हैं ।

गौ माता के गले में घंटी जरूर बांधे ; गाय के गले में बंधी घंटी बजने से गौ आरती होती है ।

जो व्यक्ति गौ माता की सेवा पूजा करता है उस पर आने वाली सभी प्रकार की विपदाओं को गौ माता हर लेती है ।

गौ माता के खुर्र में नागदेवता का वास होता है । जहां गौ माता विचरण करती है उस जगह सांप बिच्छू नहीं आते ।

गौ माता के गोबर में लक्ष्मी जी का वास होता है ।

गौ माता कि एक आंख में सुर्य व दूसरी आंख में चन्द्र देव का वास होता है ।

गौ माता के दुध मे सुवर्ण तत्व पाया जाता है जो रोगों की क्षमता को कम करता है।

गौ माता की पूंछ में हनुमानजी का वास होता है । किसी व्यक्ति को बुरी नजर हो जाये तो गौ माता की पूंछ से झाड़ा लगाने से नजर उतर जाती है ।

गौ माता की पीठ पर एक उभरा हुआ कुबड़ होता है , उस कुबड़ में सूर्य केतु नाड़ी होती है । रोजाना सुबह आधा घंटा गौ माता की कुबड़ में हाथ फेरने से रोगों का नाश होता है ।

एक गौ माता को चारा खिलाने से तैंतीस कोटी देवी देवताओं को भोग लग जाता है ।

गौ माता के दूध घी मख्खन दही गोबर गोमुत्र से बने पंचगव्य हजारों रोगों की दवा है । इसके सेवन से असाध्य रोग मिट जाते हैं ।

जिस व्यक्ति के भाग्य की रेखा सोई हुई हो तो वो व्यक्ति अपनी हथेली में गुड़ को रखकर गौ माता को जीभ से चटाये गौ माता की जीभ हथेली पर रखे गुड़ को चाटने से व्यक्ति की सोई हुई भाग्य रेखा खुल जाती है ।

गौ माता के चारो चरणों के बीच से निकल कर परिक्रमा करने से इंसान भय मुक्त हो जाता है ।

गौ माता के गर्भ से ही महान विद्वान धर्म रक्षक गौ कर्ण जी महाराज पैदा हुए थे।

गौ माता की सेवा के लिए ही इस धरा पर देवी देवताओं ने अवतार लिये हैं ।

जब गौ माता बछड़े को जन्म देती तब पहला दूध बांझ स्त्री को पिलाने से उनका बांझपन मिट जाता है ।

स्वस्थ गौ माता का गौ मूत्र को रोजाना दो तोला सात पट कपड़े में छानकर सेवन करने से सारे रोग मिट जाते हैं ।

गौ माता वात्सल्य भरी निगाहों से जिसे भी देखती है उनके ऊपर गौकृपा हो जाती है ।

काली गाय की पूजा करने से नौ ग्रह शांत रहते हैं । जो ध्यानपूर्वक धर्म के साथ गौ पूजन करता है उनको शत्रु दोषों से छुटकारा मिलता है ।

गाय एक चलता फिरता मंदिर है । हमारे सनातन धर्म में तैंतीस कोटि देवी देवता है , हम रोजाना तैंतीस कोटि देवी देवताओं के मंदिर जा कर उनके दर्शन नहीं कर सकते पर गौ माता के दर्शन से सभी देवी देवताओं के दर्शन हो जाते हैं ।

कोई भी शुभ कार्य अटका हुआ हो बार बार प्रयत्न करने पर भी सफल नहीं हो रहा हो तो गौ माता के कान में कहिये रूका हुआ काम बन जायेगा !

गौ माता सर्व सुखों की दातार है ।

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गाय भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म में एक विशेष स्थान रखती है। इसे मात्र एक पशु नहीं, बल्कि "गौ माता" कहा गया है, जो सभी देवी-देवताओं की जननी मानी जाती है। हमारे शास्त्रों में वर्णित है कि गाय के शरीर में 33 कोटि देवी-देवताओं का वास होता है। यही कारण है कि हिन्दू धर्म में गाय की पूजा की जाती है और उसे माँ का दर्जा दिया गया है।

गौ माता हमारे लिए केवल धार्मिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं हैं, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय दृष्टि से भी अत्यंत मूल्यवान हैं। गाय हमें दूध देती है, जिससे दही, मक्खन, घी और अन्य पोषक पदार्थ मिलते हैं। इसके गोबर और गोमूत्र का उपयोग खेती, दवा, और ईंधन में भी किया जाता है। गाँवों में तो आज भी गाय आधारित जीवनशैली से आत्मनिर्भरता बनी हुई है।

गाय के प्रति सम्मान और प्रेम भारतीय सभ्यता की पहचान रही है। लेकिन आधुनिक समय में गौ माता की स्थिति चिंताजनक हो गई है। बहुत सी गायें सड़कों पर घूमती हैं, कचरा खाती हैं और दुर्घटनाओं का शिकार बनती हैं। यह हमारे समाज के लिए शर्मनाक स्थिति है। हमें यह समझना होगा कि अगर हम गौ माता की रक्षा नहीं करेंगे, तो हमारी संस्कृति और नैतिकता भी संकट में पड़ जाएगी।

गौ रक्षा केवल कानून से नहीं, बल्कि जनजागरण और संस्कारों से संभव है। हमें गौशालाओं की स्थापना करनी चाहिए, बेसहारा गायों के लिए चारा-पानी का प्रबंध करना चाहिए और उनके संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास करने चाहिए। बच्चों को बचपन से ही गाय के प्रति श्रद्धा और सेवा भाव सिखाना चाहिए।

निष्कर्षतः, गौ माता न केवल सभी देवी-देवताओं की जननी हैं, बल्कि हमारी धरती की भी रक्षक हैं। उनका सम्मान, सेवा और रक्षा हमारा धर्म, कर्तव्य और सामाजिक जिम्मेदारी है। आइए हम सब मिलकर संकल्प लें कि हम गौ माता की सेवा करेंगे और उन्हें कभी बेसहारा नहीं छोड़ेंगे। यही सच्ची भारतीयता और मानवता है।

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Through your compassionate initiatives and remarkable leadership, you have demonstrated a steadfast commitment to [mention specific achievements or projects undertaken]. Your organization's selfless contributions have not only inspired others but have also set a shining example of humanitarianism and solidarity.

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